गुरुवार 1 अक्टूबर 2026 - 17:39
मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी; जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया में सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-अकरम के पहले डॉक्टरेट स्नातक

क़ुम अल मुक़द्दसा में भारतीय शोधकर्ता और धर्मशास्त्री मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी ने जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया में सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-अकरम के विषय में डॉक्टरेट के पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा कर इस क्षेत्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले पहले शोधकर्ता होने का गौरव प्राप्त किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम अल मुक़द्दसा में भारतीय शोधकर्ता और धर्मशास्त्री मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी ने जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया में सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-अकरम के विषय में डॉक्टरेट के  पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया और इस क्षेत्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले पहले शोधकर्ता बने हैं।

मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी ने अपने डॉक्टरेट की थीसिस का सफलतापूर्वक बचाव किया। उनकी थीसिस का शीर्षक ‘शारीरिक इबादतों के अहकाम की व्याख्या में पैग़म्बर-ए-अकरम की व्यावहारिक सीरत’ है। इसमें पैग़म्बर-ए-अकरम की व्यावहारिक सीरत और शारीरिक इबादतों से संबंधित अहकाम के बीच संबंधों का विस्तृत शैक्षिक एवं शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया के जनसंपर्क विभाग के अनुसार, मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी ने वर्ष 2022 में उच्च श्रेणी प्राप्त करते हुए सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-अकरम के पाठ्यक्रम की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने इसी शैक्षिक क्षेत्र में अपना शोध जारी रखा और डॉक्टरेट की सीसिस पूरा की। उनकी डॉक्टरेट की डिग्री इस्लामी गणराज्य ईरान के विज्ञान, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 12 सितंबर 2026 को जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया के कुलपति डॉ. अली अब्बासी ने कई विद्वानों एवं शैक्षिक हस्तियों की मौजूदगी में मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी को डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की।

सीरत-ए-नबवी को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास

जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया के अनुसार, मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी के शोध की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-अकरम को केवल ऐतिहासिक घटनाओं और रिवायतों के संग्रह के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया, बल्कि पैग़म्बर-ए-अकरम के व्यावहारिक जीवन को एक स्वतंत्र शैक्षिक एवं शोध का विषय बनाया गया है।

सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-अकरम के विषय पर अतीत में भी विभिन्न भाषाओं में अनेक शोध-पत्र और पुस्तकें लिखी गई हैं। हालांकि, इस शोध में विशेष रूप से पैग़म्बर-ए-अकरम की व्यावहारिक सीरत को मुख्य विषय बनाया गया है और यह अध्ययन करने का प्रयास किया गया है कि आपकी व्यावहारिक जीवन-शैली किस प्रकार शारीरिक इबादतों के अहकाम और उनकी व्याख्या में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

यह शोध सीरत-ए-नबवी के अध्ययन को फ़िक़्ही और व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ने का भी प्रयास करता है, जिससे इबादतों के अहकाम को पैग़म्बर-ए-अकरम के व्यावहारिक जीवन की रोशनी में समझने में सहायता मिल सकती है।

जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया ने इस उपलब्धि को सीरत-ए-नबवी के विशेषज्ञतापूर्ण अध्ययन के विस्तार और इस क्षेत्र में विशेषज्ञ शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक प्रगति बताया है। इस शोध से अंतर्राष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-अकरम के गहन एवं विशेषज्ञतापूर्ण अध्ययन के नए पहलू सामने आते हैं।

मौलाना सय्यद फ़याज़ मोहसिन आबिदी का संक्षिप्त परिचय

मौलाना सय्यद फ़याज़ मोहसिन आबिदी का पैतृक निवास मुहम्मदाबाद गोहना, ज़िला मऊ, उत्तर प्रदेश, भारत है। उनके पिता हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ में कॉन्ट्रैक्ट सेल मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। इसी कारण मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी ने जन्म से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा रेनुकूट, ज़िला सोनभद्र में प्राप्त की।

इंटरमीडिएट के बाद वे अपने पैतृक स्थान लौटे और शिब्ली कॉलेज तथा पूर्वांचल विश्वविद्यालय से दोहरी स्नातक उपाधि प्राप्त की। इसी दौरान उनका चयन अल-मुस्तफ़ा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के लिए हुआ और वे उच्च शिक्षा के लिए ईरान चले गए।

अपने शैक्षिक सफ़र के दौरान वे लगातार विश्वविद्यालय के मुमताज़ छात्रों में शामिल रहे और उन्हें विभिन्न शैक्षिक प्रमाण-पत्रों, पुरस्कारों और सम्मानों से नवाज़ा गया।

अल-मुस्तफ़ा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में सीरत-ए-पैग़म्बर-ए-इस्लाम विभाग की औपचारिक शुरुआत के बाद मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी ने इस विभाग में अपनी शैक्षिक एवं शोध गतिविधियां जारी रखीं और वे इस विभाग से पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले पहले शोधकर्ता बने।

मौलाना सय्यद फ़य्याज़ मोहसिन आबिदी उर्दू, फ़ारसी और हिंदी भाषाओं में विभिन्न शैक्षिक एवं शोधपरक लेख भी लिखते हैं। वे वर्तमान में अल-मुस्तफ़ा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में अध्यापन सेवाएं दे रहे हैं तथा मास्टर और पीएचडी के छात्रों के शोध-प्रबंधों में सलाहकार, संरक्षक और परीक्षक के रूप में भी शैक्षिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

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